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 गड़ती चुभती सी है वो रात  जिसकी सुबह में तुम न होंगे  सांसे खर्च हो रही है पर  कमबख़्त फासले कम न होंगे
 शायद ये सच ही है  पर सच तो ये भी है  की तुम सुनने लगे हो  तो हम कहने लगे है  खयालों में सही  साथ रहने लगे हैं  वक्त की बात है  आज है कल नहीं  खामोशी वैसे भी  कोई हल तो नहीं?  कह लेने दो ना  मुझे रह लेने दो  जब मैं बरशा करू  ख़ुद को बह लेने दो  जैसे चाहोगे तुम  वैसी हो जाऊँगी  हँसी तुम्हारी खो गई  तो मैं भी खो जाऊँगी  बहुत शुकून है की  अभी साथ में तुम हो  बहुत शुकून है की  की हर बात ने तुम हो  की हर बात ने तुम हो