बच्चो सी आदत तुम्हारी - मेरी

किसी ने कहा था कभी मुझसे
अभी अभी या ना जाने कभी कही
की ढूंढते हो तुम मुझेको
क्यूकी मैं हू खोया हुआ
जब आजा उंगा सामने
नही होगी तुमको मेरी तलाश
ना ही मेरी उन बातो की
जो अच्छी लगती है तुमको
ना दिखेगी तुमको मेरी वो हँसी
खिल उठता है आज जिससे दिल तुम्हारा
बन कर रेह जौँगा मैं
वो खिलौना
उस बच्चे के हाथ का
जिसे रखा दराज़ पैर देखा था
उसने खिलोने की दुकान प र
एकबार आने से हाथ मे
फिर लगी ढूँढने निगाहे वो
जो ना मिल सका
हमेशा हमेशा
तलाशा है तुमने , कमियो को
अपने मे,अपने आस-पास और
अपने हालातो प र
एक दिन तसल्ली से कभी देखो
जो दिया है तुमको ,तुम्हारी किस्मत ने
आज़माओ नही और
एक दिन के लिए
भूल जाओ जो नही पाया
और जी लो जी भर के उसको
जिसको पाया है इससे पहले की
वो भी तुमसे खो जाए
खोने की आदत तो तुम्हारी पुरानी है.

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