समय

समय की धार पर, जैसे तलवार पर
चलते चलते आ गए हैं हम इतनी दूर
जहाँ से लौटने के असार तो नहीं
पर बेलगाम मन को, चाहत है जरुर

Comments

Unknown said…
This comment has been removed by the author.