बस हाथ थमने से

मेहँदी से लिखी मैंने


और आंसुओं से मिटाई

कहानी मुहब्बत की

दास्ताँ सपनो की

धुलकर जो सामने आई

मेरे हाथ की लकीरे

टेढ़ी मेढ़ी और उलझी उलझी

भाषा जिसकी न मैंने समझी

ना की कभी तुमने कोशिश


बस बंद करके मुट्ठी

चलते रहे हम, इतना न समझे

की जुडती हैं लकीरे

बस हाथ थमने से

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