मुकम्मल हर इश्क़ जो होता
तो कैसे ये जबान
नमक आंसुओ का चखते
न राते हिज़्र की आती
न अस्मा के
तारे ही गिनते
न जानते जहर भी
पिया जाता है ऐसे
न अपने सीने पे हाथ रख
उनकी धड़कने सुनते

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