बर्फीले रेगिस्तानों में भी
कभी बसंत तो आएगा
पिघलेगी चट्टानें सर्द
सूरज गर्मी बरसायेगा 

मंजर मंजर हर डाली फिर
कोयल कोयल बोलेगी 
खोल ह्रदय के दरवाजे 
प्रकृति प्रेम में डोलेगी 

इंतजार में बैठे बीज 
पनपेंगे और बढ़ेंगे भी 
खुलेगी कोपल कली कली के
खुशबु से महकेंगे भी

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