तौबा और कितने इश्क के इम्तेहान ज़ालिम
रूह बेचैन हैं और तू बड़ा ही बेवफ़ा ज़ालिम
खामोशियाँ नश्तर ,ज़हर सी नसों में बेबसी
उसपर शोलों सी, बारिश की हर एक बूँद ज़ालिम
रूह बेचैन हैं और तू बड़ा ही बेवफ़ा ज़ालिम
खामोशियाँ नश्तर ,ज़हर सी नसों में बेबसी
उसपर शोलों सी, बारिश की हर एक बूँद ज़ालिम
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