टूट टूट, कई बार जब जुड़ता है
ऐसे ही, दिल तो मजबूत होता है

कसक हर दरारों से जब झांकती है
हवा तभी तो इश्क से महकाती है

न होता है किसी आशिक का इंतज़ार
माशूक़ा, ख़ुद पे हो मग़रूर, इतराती है

बहने लगता है रगों में जब और धड़कता है
इश्क वाला लव, तब जाके कहीं होता है

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