“क्या तुम गाते हो?”
“नहीं!”
“जाओ फिर. प्यार ख़ाक करोगे “

ये थी हमारी तीसरी मुलकात. हर बार बस तीन लाइन की वार्तालाप. वह कुछ पूछती, हम कुछ कहते और वो फैसला करके निकल जाती.

अब ऐसे होगा क्या प्यार? हम सोचते रह जाते.

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