सफर अच्छा कटा
अब रास्ते अलग हैं
मोड़ आ गया है वो
जहाँ होते जुदा हैं
अब आगे हमें
हैं जाना अकेले
रात यही काट ले?
चले जाना सबेरे
लम्हे आखिरी साथ के
कुछ ऐसे बिता ले
की आसान हो सफर
या फिर सुबह न आये

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