है भर दिया ये दामन,पूरा हुआ ये जीवन
बस आने से तुम्हारे,है अखिल जग पावन
लगकर गले और झाककर बस मेरी अन्खो मे
रुत हर एक सजा दी, जहा बरसते थे सिर्फ़ सावन

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