धरती से बंधकर अब बोर हो चुके हैं
जी करता है कुछ दिन, सूरज से बन्ध जाये
यु घूम घूम चक्कर ने दूर कर दिया है
शायद किरणों पे सवार हो, रोज़ तुमको छु पाये

Comments

Popular posts from this blog

इंतज़ार

Imagining things