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भूत वूत कुछ नहीं होते वो तो कम्बख्त यादे होती हैं जो पीछा ही नहीं छोड़ती साये सा मंडराती है हर घडी पर किसी और को नज़र नहीं आती कभी कभी तो एकदम से सामने आकर खड़ी हो जाती हैं लगता है सपना हो, डरावना और फिर गायब होश उड़ाकर ऐसे जैसे कुछ हुआ ही नहीं और जिंदगी गायब ** Happy Halloween ** 👻
I did not come this far To turn around or stop I did not win that war To lose myself and drop I did not walk numerous rains To just hide tears when I cry I did not breath, every breath To stay alive and still die I did not run so fast To collapse, as I finally reach I came all the way So I can , finally meet me 
तौबा और कितने इश्क के इम्तेहान ज़ालिम रूह बेचैन हैं और तू बड़ा ही  बेवफ़ा ज़ालिम खामोशियाँ नश्तर ,ज़हर सी नसों में बेबसी उसपर शोलों सी, बारिश की हर एक बूँद ज़ालिम 
मॉडर्न मीरा २ दिमाग सुन्न हो रहा है बिलकुल. अब तो एक भी बात जैसे मुझे सुनाई भी नहीं दे रही. क्लब में म्यूजिक तेज़ और तेज़ होता जा रहा है, और दिल की धड़कने भी. पसीने की बूँद से शरीर का कोई हिस्सा अब बचा नहीं जो नहाया न हो, जबकि हाथ में अब मेरे ये चौथी ठंढी बियर की बोतल है. मुझे तो २ के बाद ही रुक जाना था लेकिन न ये शाम ढल रही है और न मुझे उस रात की ओर  रुख करना है जो साली काटने को दौड़ती है. ठंढी बोतल को थोड़े देर यु ही अपने गले में लगाए, आंखे बंद करती है मीरा. क्रिश. उफ़, क्या मुसीबत है. ये २ बियर के बाद सिर्फ इसका ही नाम क्यों याद रह जाता है. उसे तो मेरी कभी पड़ी ही नहीं। न जाने कहाँ बैठा अपने दर्द भरे नग्मे किस किस में बाँट रहा है, वो ही जाने. आह. कैसे बता दू उसको एकबार की कितनी ज़ोर की लगी है मुझे उसकी लत. कैसे? लड़खड़ाती सी, मीरा कोने में रखे काउच पर निढाल सी बैठ जाती है. क्रिश. फिर से? कैसा बैर है मेरे दिल और दिमाग को मुझी से. बियर को टेबल पर रख, दोनों हाथ में सर पकड़े मीरा आंखे बंद कर लेती है थोड़े देर. कब जाउंगी घर? कौन सा घर? या मकान? कहाँ जाऊं मैं? बस पता हो...

मेरी क़िस्मत, रगों में हैं

लकीरों में नहीं है कुछ है कुछ तो जूनून दिल में हो पागल , कोई हो रोग मुहब्बत चीखे सीनो में सुलगती रहे ये चिंगारी हो इश्क खुद से, जीने में चला जा राह जो मिल जाए नहा अपने पसीनों में न कोई डर नहीं सरहद नहीं कोई पाबंदी लबो पे हैं अब तो चाहे जो भी हो मेरी क़िस्मत, रगों में हैं 
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धरा अभी अभी घर लौटी है , काम होता है सारा दिन बाहर। पर कोई थकन नहीं है आज. कैसे हो , रस्ते भर बारिशो में ड्राइव किया है आज. बड़ी ट्रैफिक थी, लेकिन उसे जैसे कुछ फर्क ही नहीं पड़ता. एकबार बारिश क्या हुयी, घुल सी जाती है उसकी आत्मा जैसे. और फिर कहाँ कहाँ बहता है उसका मन, वो तो वही जाने. छतरी तो कभी नहीं भाई उसको. बालो में अभी तक है हज़ारो बूंदो के मोतियाँ जड़े है, जब वो चाभी घुमाकर ताले को खोलती है. कुछ पल और ठिठक कर २-४ बून्द और गिरने देती है माथे पर. आंखे बंद करके। व्योम खामोश कांच  की खिड़की से लगा न जाने क्या गिन रहा है, बादल बुँदे या अपनी धड़कने. भगवान जाने. क्या करते हो ऐसी बारिशों वाली शामों में? ख़ास कर जब शाम ढल जाये और हलकी सी अंधेरो की चादर ओढ़ कर बैठ जाया करती है धरा. कुछ नहीं? मैं क्यों करून कुछ? फिर भी , कुछ तो? शायद बस देखा किया करता हूँ , बूंदो को गिरते झड़ते। क्यों देखते हो बस? कभी बस ऐसे ही भीग जाया करो. किया है वो भी, अब नहीं करता. क्यों नहीं करते? बस नहीं करता तो नहीं करता. जबरदस्ती थोड़े है कोई. अनमनी सी धरा फिर केटली में चाय डाल कर उसके उबलन...
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Not asking Not wanting Not waiting Giving Receiving And loving With peace At ease
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Don’t Don’t ask me to love you And I won’t ask you  To love me either Because if I have to  And  when it’s meant to I will fall Just like that magenta leaf Falling from branches  When the season arrives Seasons of love I will fall and so will you  Uncontrollably  Unconditionally  Without having to catch Without knowing where and how Every colored leaf falls Once that color scatters All over it By the sheer powers of nature  It does Fall in love And so will you  And I will be there to catch you Because We are meant to

Love Unconditionally

Love Unconditionally  Is that a Myth? Does that even exist? What is it to feel like being loved unconditionally? What does it feel when you love someone unconditionally? Do you even realize it? Do you want your beloved to realize the same? What is it? As I walked the same beaten path for my morning run this morning, all these thoughts floated in my mind. It is confusing to think about unconditional love because ‘love’ by itself is somehow socially acceptable to be a bit selfish, a bit needy and a bit possessive. It is usually described that for love to be true, it must be reciprocated. ‘One-sided love’ is a somewhat unacceptable standard of love and considered a sort of failed desperate need of being desirable. I feel we confuse ‘love’ with ‘desire’ a lot of times. Not that ‘desires’ do carry a tinge a ‘love’ and sometimes those ‘fulfilled desires’ provide a sense of contentment that feels a lot like the swelling in the heart when you feel ‘loved’, but is that it? Or is it mo...
धरा ज़रा सी खो गयी है , क्युकी व्योम भी अब अपने अथाह में विलीन हो गया है.  उसका तो कभी भी  कोई अदि या अंत नहीं था तो वैसे ही वो कभी किसी डोर से नहीं बंधा था।  वो शायद छूट चुका है और उड़ गया है कही किसी हीलियम के गुब्बारे की तरह.  धरा कुछ दूर , कुछ देर तक उसके आकाशी रंग को मध्धम होते देखती गयी. पहले बेचैनी में और फिर बेबसी में. अब कुछ नहीं, फिर भी  कहीं न कही कुछ चुभता सा तो है अभी भी. वो भी चला जायेगा, बस वक़्त का साथ होना चाहिए.  धरा के पास यु छूट जाने की कोई गुंजाइश नहीं है. उसे तो टिक के रहना है न. वो अपने सीने में कितने ही पेड़ो की अर्सो से जड़ें गाड़े जो बैठी है. व्यथा , ठोकर, चोट ये सब धरा को चुपचाप सहते रहने की आदत तो नहीं, पर फिलहाल जरूरत है. तभी तो जमीन और उनपर पड़े घाव हमेशा हरे रहते हैं, वरना सब बंजर न हो जायेगा।  लेकिन क्या करे धरा, कब तक उस गुब्बारे के छूट जाने का अफ़सोस करे? कबतक अपने ही घास पर लेटी ढूंढा करे उन नजरो को , जिसके निहार लेने से उसके  तारों में भी कुछ छेड़ छाड़ हो जाया करती थी. अब तो जैसे हर सितार की धुनें मंद हैं. बेवज...