कैसे ख़तम होती है कहानी बस इतना जो पता होता तो फिर देखते तुम और जानती दुनिया मुझको और मेरी लेखनी को लेकिन क्या करूँ, की मुझे बस पता है की कैसे होती है शुरू , पर अंत विहीन कैसे लिखू जब नहीं जानती कैसे होगी ख़तम क्या तुम्हे पता है?
Posts
- Get link
- X
- Other Apps
पहनकर प्यार कलाई में, सजाकर प्यार माथे पर बदलकर हार गलो के विदा तुमने किया बहाकर गंगा आँखों से, रखकर ह्रदय पर हिमालय मुरझाया सा लेकर कमल-सा मन विदा तुमने किया खोलकर मन की सारी गाँठ, मिटाकर भ्रान्ति के एहसास बांधकर गठारी भर विश्वाश विदा तुमने किया पाने को ये सौगात, मिटाने दुनियाभर की थकान चखने प्रेम के असली स्वाद मैं वापस आऊंगी
- Get link
- X
- Other Apps
बड़ा ही मायूस आज ये मन है, हफ्ते भर से सोच मगन है आखिर भूल हुयी है कौन सी, खुद पर अब संदेह हुआ है सच तो है मासूम नहीं मैं, कभी स्वार्थ से कभी मोह से कौन बचा है? बची नहीं मैं लेकिन इतना भी मानो सच है, जिसको गले लगया है बाते चाहे नहीं बनायीं, लेकिन जीवन-ह्रदय बसाया है कोई चाहे कुछ भी कह दे,सुन लुंगी-दुहरा भी दूं लेकिन जिसको दोस्त कहा था, उसको कैसे ठुकरा दूं? शायद मैंने गलत सुना था , या फिर तुमने झूठ कहा? गरिमा, मर्यादा रिश्तो की, रह गए नाहक शब्द भला? गर वो सब था दिखलावा, तो फिर आखिर सच क्या है? कोई मुझको बतलाये फिर इस रिश्तो का अर्थ क्या है? बेमतलब सब कुछ अर्थहीन , बातो बातो पे अग्निपरीक्छा कब तुम कैसी राह धरोगे, ये सब बस तुम्हारी इच्छा? चोट लगी जब सहलाया पुचकारा थोडा फुसलाया और फिर अपनी राह पकड़ ली, ऐसी कैसी रिश्तेदारी? है दम और बिस्वास जरा भी तो फिर दिखला सच्चाई करो सामना, यही वक़्त है, लो अपनी अपनी जिम्मेदारी
- Get link
- X
- Other Apps
जटिल बड़े जटिल सवाल कई जवाब लेकिन नहीं कोई सही जवाब उपयुक्त? लगते से कुछ मुझे लेकिन, वही बे बुनियाद जब उन्हें परखो फिर एक बार भ्रमित, उलझन में खोया सा मनुष्य, परखते परखते एक के बाद,एक और जवाब किसी बिरले की होती है किस्मत भली की लगता है अंक सही पहली या दूसरी बार और समेट मोहरे, मनाता है जीवन का त्यौहार हम तो उन बचे खुचे लोगो की भीड़ में जिन्हे बस उम्र भर जवाब ढूँढने हैं.
- Get link
- X
- Other Apps
परछाई मेरी चलती तो हो मेरे साथ साथ क्यों नहीं बोलती कुछ क्यों रहती हो चुप चाप तुमसे करीब और कौन मुझसे तुमसे दूर रहे कोई कैसे गुम हो जाती हो लेकिन, अँधेरा घिरते ही छोडती हो मुझको अकेली , जान के भी की डर लगता है मुझको, हर अंधकार से ख्याल आते है, बेकार न जाने कहाँ से रौशनी की एक किरण से, उठ कड़ी होती हूँ मेरी परछाई, मेरी सहेली, को जो पाती हूँ कद तुम अपना भले बदलती रहेती हो पर सच तो ये है, साथ सदा रहेती हो
- Get link
- X
- Other Apps
आज सुबह उठकर किरणों से रोशन, देखा भीगी घास में उछलते भागते, और चुचाप बैठकर निहारतेएक खरगोश को, लगाते छलांगे तो फिर पूछा मैंने, क्यों क्या तुम भी जागे हो कल रात नहीं आई नींद - क्यों की थी मन में सोच? क्या लाएगी कल की सुबह या भी था डर की होगी या न होगी सुनहरी तकदीर और लाएगी भोर करवट बदलने में भी ये थी झिझक की कही डोलेगा इन्द्र का सिन्हासन और आज ही की रात हो जायेगा सब भष्म किसी तरह से काटी रात दर-दर कर ली हर एक सांस धुप की हर किरण से जगी उम्मीद और आये हो देखने, बाहर भविष्य क्यों किया व्यर्थ तुने ए दोस्त वो स्वपन जो आनेठे कल रात रह गए अधूरे कई ख्वाब जाओ जाओ जी भर के जी लो ये पल क्युकी बस यही तो जो, फिर लौट के नहीं आता
- Get link
- X
- Other Apps
दिल में यु तो आरजुएं हज़ार जो पाती हैं बस इंतज़ार तडपती रूह है हर पल पाने को उनके एक दीदार आँखे खुली हो या हो बंद नज़र आते हैं बस वही छूटती हर लम्हे के साथ उनसे मिलने की उम्मीद ख्वाबो और खयालो में बनाकर एक ताजमहल भरकर सनम को बाहों में हो जाए किसिदीन ये जो अगर गुज़र जाए मुहब्बत का जूनून इस जिश्म से , इससे पहले की बंद हो जाए धड़कना दिल का और रह जाए तरसती रूह सदियों तक हमारे ताजमहल में
- Get link
- X
- Other Apps
सिरहाने रखकर तेरी याद, हर रात हम सोये हैं दुहराते मन में ख्याल, हर एक पुरानी बात भीगे तकियों पे, बदलते करवट उनीदी रात, हमने काटी है चुभते सपनो के साथ, अनगिनत बार ढकते काजल से, जागी आँखों के दाग हर सुबह, आइने के पास झूठी मुस्कान, बस एक उम्मीद और इंतज़ार झूठी ही सही, फिर भी आखिर है तो ये आस टटोलते मन को न जाने किस ख़ुशी की तलाश
- Get link
- X
- Other Apps
होली नहीं मनाई जबसे धुलने वाले रंगों से सात समन्दर दूर हुए, घर से साथी-संगो से झूठ ये होगा अगर कहेंगे, जीवन में कुछ कमी नहीं जब भी ऐसे दिन आये हैं, आँखों में एक नमी नहीं लेकिन सच तो ये भी है की, सबने अपनाया है रिश्ते नए ,नयी दोस्ती , नया परिवार बनाया है होली तो ऐसा उत्सव है, जो ये याद दिलाता है रंग दिलो पर प्रेम-भाव का, धुलने से कब धुलता है?